यह दूसरा सबसे ज्यादा रकम जुटाने वाला साल IPO के जरिए रहा है। इससे पहले 2017 के कैलेंडर साल में 36 कंपनियों ने 67,147 करोड़ रुपए की रकम जुटाई थी - Dainik Bhaskar

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मुंबईएक घंटा पहले

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यह दूसरा सबसे ज्यादा रकम जुटाने वाला साल IPO के जरिए रहा है। इससे पहले 2017 के कैलेंडर साल में 36 कंपनियों ने 67,147 करोड़ रुपए की रकम जुटाई थी - Dainik Bhaskar

यह दूसरा सबसे ज्यादा रकम जुटाने वाला साल IPO के जरिए रहा है। इससे पहले 2017 के कैलेंडर साल में 36 कंपनियों ने 67,147 करोड़ रुपए की रकम जुटाई थी

  • एसबीआई कार्ड, अडाणी पोर्ट भी डिमांड के मामले में टॉप 10 में शामिल हैं
  • जोमैटो के इश्यू में रिटेल निवेशकों का केवल 7.87 गुना ही हिस्सा भरा

शुक्रवार को बंद हुए जोमैटो के IPO को कुल 2.13 लाख करोड़ रुपए की डिमांड मिली है। भारतीय शेयर बाजार में अब तक सबसे ज्यादा डिमांड के मामले में यह तीसरा IPO है। इससे पहले रिलायंस पावर और कोल इंडिया को सबसे ज्यादा डिमांड मिली थी।

जोमैटो का IPO 40 गुना भरा

आंकड़े बताते हैं कि जोमैटो का IPO 40 गुना भरा और इसे 2,13,285 करोड़ रुपए के लिए डिमांड मिली थी। जबकि साल 2008 में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर का 11,563 करोड़ रुपए का IPO आया था। यह 73 गुना भरा था। इसे 8 लाख 48 हजार 562 करोड़ रुपए के लिए डिमांड मिली थी। दूसरे नंबर पर कोल इंडिया था। सबसे बड़ा यह इश्यू था। 15,199 करोड़ रुपए जुटाया था। इसे 2,32,247 करोड़ रुपए के लिए डिमांड मिली थी।

अडाणी पोर्ट ने 1,771 करोड़ रुपए जुटाया

अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी पोर्ट ने साल 2007 में 1,771 करोड़ रुपए का IPO लाया था। यह 116 गुना भरा था। इसे 2 लाख 5 हजार 153 करो़ड़ रुपए के लिए डिमांड मिली थी। पिछले साल एसबीआई कार्ड का 10,355 करोड़ रुपए का इश्यू आया था। यह 27 गुना भरा था और इसे 2.04 लाख करोड़ रुपए के लिए डिमांड मिली थी। जबकि पिछले साल ही एचडीएफसी म्यूचुअल फंड का IPO आया था और इसे 1.72 लाख करोड़ रुपए के लिए डिमांड मिली थी।

जितनी अप्लीकेशन मिली, उसे डिमांड कहते हैं

डिमांड का मतलब कुल कितने पैसों के लिए कंपनी को अप्लीकेशन मिली, उससे जुड़ा है। किसी भी IPO को चार तरह के निवेशक लेते हैं। जैसे IPO खुलने से पहले एंकर निवेशक होता है। फिर IPO खुलने पर रिटेल, एचएनआई और क्यूआईबी होते हैं। यह सब मिलाकर जितना निवेश करते हैं, उसे ही डिमांड कहते हैं। हालांकि अलॉटमेंट के समय उतना ही शेयर मिलता है, जितने के लिए कंपनी IPO लाती है।

जोमैटो का साइज बड़ा था

जोमैटो का चूंकि IPO साइज बड़ा था, इसलिए उसे 2 लाख करोड़ से ज्यादा की डिमांड मिली। जबकि हाल के सालों में 200 गुना तक सब्सक्राइब होने वाले IPO की डिमांड काफी कम रही है, क्योंकि उनका साइज छोटा रहा है। ऐसे में जब एलआईसी का आईपीओ आएगा तब काफी सारे रिकॉर्ड टूटेंगे। इसमें सबसे बड़ा आईपीओ, रिटेल का हिस्सा, वैल्यूएशन, मार्केट कैपिटलाइजेशन और फिर डिमांड जैसे सारे रिकॉर्ड टूटेंगे। यह भी रिकॉर्ड इसी साल होगा।

रिटेल निवेशकों ने नहीं ली दिलचस्पी

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जोमैटो के IPO में रिटेल निवेशकों ने बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं ली है। केवल 7.87 गुना भरा है। जबकि इस साल जो IPO आए हैं उसमें अधिकतर में रिटेल का हिस्सा 10 गुना से ज्यादा भरा है। इजी ट्रिप में तो यह 70 गुना तक भरा है। जोमैटो में कुल 32 लाख अप्लीकेशन मिले जबकि रिलायंस पावर में 47 लाख अप्लीकेशन मिले थे। इसी साल इंडिगो पेंट्स के IPO को 30 लाख अप्लीकेशन मिले थे। यह 117 गुना भरा था।

पहला यूनिकॉर्न स्टार्टअप रहा है जो IPO लाया

जोमैटो देश में पहला यूनिकॉर्न स्टार्टअप रहा है जो IPO लाया है। इसलिए निवेशकों का इसमें उत्साह बना हुआ था। हालांकि यह लगातार घाटा देने वाली कंपनी रही है। जोमैटो का शेयर 72-76 रुपए के बीच बेचा गया। इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन लिस्टिंग के बाद 64,500 करोड़ रुपए होगा। देश में इस साल कुल 25 कंपनियों ने IPO के जरिए 39,303 करोड़ रुपए की रकम जुटाई है। यह दूसरा सबसे ज्यादा रकम जुटाने वाला साल IPO के जरिए रहा है। इससे पहले 2017 के कैलेंडर साल में 36 कंपनियों ने 67,147 करोड़ रुपए की रकम जुटाई थी।

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