दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के समूह जी-7 ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर टैक्स लगाने की ‘ऐतिहासिक’ डील फाइनल की है। - Dainik Bhaskar

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लंदन21 मिनट पहले

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दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के समूह जी-7 ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर टैक्स लगाने की ‘ऐतिहासिक’ डील फाइनल की है। - Dainik Bhaskar

दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के समूह जी-7 ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर टैक्स लगाने की ‘ऐतिहासिक’ डील फाइनल की है।

  • जी-7 के बाद अन्य देश भी कर सकते हैं इस व्यवस्था के लिए पहल

जी-7 देशों (ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, इटली और जापान) के वित्त मंत्रियों की लंदन में हुई बैठक में इस बात पर सहमति बनी है कि कंपनियों की उन्हीं देशों में टैक्स देना होगा, जहां वे कारोबार करती हैं। दरअसल, टैक्स कानूनों का फायदा उठाकर कई कंपनियां ऐसे देशों में मुनाफा दिखा देती हैं, जहां उन्हें कम टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा बैठक में न्यूनतम 15% कॉर्पोरेट टैक्स पर भी सहमति बनी है। ऐसा देशों के बीच कम से कम टैक्स की होड़ से बचने के लिए किया गया है। इन फैसलों से गूगल, फेसबुक और अमेजन जैसी कंपनियों पर ज्यादा असर पड़ेगा।

ब्रिटेन के वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने कहा, ‘दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के समूह जी-7 ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर टैक्स लगाने की ‘ऐतिहासिक’ डील फाइनल की है। ऐसा बहुराष्ट्रीय कंपनियों को व्यापार के लिए समान अवसर मुहैया कराने के लिए किया गया है।’ एक रिपोर्ट के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट की आयरिश सहायक कंपनी ने पिछले साल करीब 23 लाख करोड़ रुपए के मुनाफे पर कॉर्पोरेट टैक्स ही नहीं दिया था, क्योंकि उसने खुद को बरमूडा की बताया था। इस फैसले के बाद अन्य देशों पर भी टैक्स को लेकर दबाव बढ़ेगा। खास तौर पर जी-20, जिनकी अगले महीने बैठक होनी है। इनमें भारत, चीन, रूस और ब्राजील भी हैं।

टैक्स सिस्टम का ऐसे फायदा उठाती हैं

सरकारों के सामने लंबे वक्त से अलग-अलग देशों में कारोबार चला रहीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों से टैक्स वसूलने की चुनौती रही है। फिर अमेजन और फेसबुक जैसी दिग्गज टेक कंपनियों में आए उछाल के बाद चुनौती और बड़ी हो गई। कंपनियां ऐसे देशों में अपनी शाखाएं स्थापित कर सकती हैं, जहां कम कॉर्पोरेट टैक्स चुकाना पड़ता है और वो वहीं अपना मुनाफा दिखाती हैं।

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