The biggest problem for the industry is inflation in raw materials, restrictions on movement have a profound effect on the pace of economic recovery. | उद्योग जगत के लिए सबसे बड़ी परेशानी बनी कच्चे माल में महंगाई, आवाजाही पर पाबंदियों से रिकवरी की रफ्तार पर गहरा असर

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कुछ ही क्षण पहले

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  • PHDCCI ने सर्वे में शामिल 73% प्रतिभागियों ने कहा, कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी से हो रही है दिक्कत
  • 64% कारोबारियों को वर्किंग कैपिटल की अनुपलब्धता से परेशानी, 63% को मार्जिन बचाए रखने में मुश्किल

कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी उद्योग जगत के लिए सबसे बड़ी परेशानी का सबब बन रही है। दरअसल, देश के कई हिस्सों में आवाजाही पर लगी पाबंदी से इकोनॉमिक रिकवरी की रफ्तार पर गहरा असर हुआ है। इसकी वजह सामान की आवाजाही में आई रुकावट के साथ डिमांड में आई कमी रही है। प्रमुख उद्योग चैंबर PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के सर्वे में यह बात निकलकर सामने आई है।

कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी की समस्या से जूझ रहे हैं 73% प्रतिभागी

PHDCCI ने यह सर्वे कोविड-19 की दूसरी लहर के असर का अनुमान लगाने के मकसद से किया था। PHDCCI ने 34 सेक्टरों पर कराए गए सर्वे में पाया कि 73% प्रतिभागियों को कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी की समस्या जूझना पड़ रहा है।

वर्किंग कैपिटल की अनुपलब्धता से जूझ रहे हैं 64% कारोबारी

कारोबारियों को इसके अलावा जिन दूसरे मोर्चों पर दिक्कत हो रही है, उनमें वर्किंग कैपिटल (64%) की उपलब्धता भी शामिल है। PHDCCI के सर्वे में शामिल 63% प्रतिभागियों को प्रॉफिट मार्जिन बचाए रखने, 62% को मांग में कमी और 61% को फुल वर्कफोर्स बनाए रखने में दिक्कत हो रही है।

कंपनियों के प्राइस और कॉस्ट मार्जिन में काफी कमी आई है

PHDCCI के प्रेसिडेंट संजय अग्रवाल ने कहा, ‘सामान की आवाजाही में दिक्कत आने से कमोडिटी के दाम आसमान छू रहे हैं। इसकी वजह से कोरोना वायरस से फैली महामारी के बीच कंपनियों के प्राइस और कॉस्ट मार्जिन में काफी कमी आई है।’

कर्मचारियों के टीकाकरण को प्राथमिकता दे रहीं 73% कंपनियां

सर्वे के मुताबिक, 73% कंपनियां मौजूदा मुश्किल हालात से निपटने की अहम रणनीति के तहत कर्मचारियों के टीकाकरण को प्राथमिकता दे रही हैं। कंपनियां कॉम्पिटिशन करने की क्षमता बढ़ाते हुए बिक्री और कारोबार का साइज बड़ा करने पर भी ध्यान दे रही हैं।

47% प्रतिभागियों ने सरकार के राहत उपायों को 10 में से 7 अंक दिए

सर्वे में शामिल 47% प्रतिभागियों ने कोविड के असर को कम से कम रखने के लिए सरकार की तरफ से किए गए उपायों को 10 में से 7 अंक दिए हैं। इसके अलावा 42% प्रतिभागियों ने टीकाकरण अभियान को 10 में से 6 नंबर दिए हैं।

दूसरी लहर का असर घटाने के लिए बड़े राहत पैकेज की जरूरत

अग्रवाल ने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज वृद्धि दर की राह बनाने और इकोनॉमी, ट्रेड और इंडस्ट्री पर कोविड की दूसरी लहर के असर को कम से कम रखने के लिए बड़े राहत पैकेज की बहुत जरूरत पड़ेगी।’ वित्त वर्ष 2020-21 में कोविड के चलते देश की अर्थव्यवस्था का आकार 7.3% घट गया था।

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