होटल में पहुंचने के लिए स्टेशन के अंदर ही एक गेट बनाया गया है। जहां से सीढ़ियों या लिफ्ट के जरिए यात्री ट्रेन से उतरकर सीधे होटल तक पहुंच सकें।

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गांधीनगर7 घंटे पहले

स्टेशन के निर्माण में 790 करोड़ रुपए का खर्च आया है। 74 फीसदी गुजरात सरकार और 26 फीसदी खर्च रेलवे मंत्रालय द्वारा किया गया है।

गुजरात की राजधानी गांधीनगर में एयरपोर्ट की तर्ज पर रेलवे स्टेशन बनाया गया है। इसके ऊपर फाइव स्टार होटल भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 जुलाई को इसका उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगा। इसके साथ ही मोदी गुजरात साइंस सिटी में एक्वेटिक एंड रोबोटिक्स गैलरी और नेचर पार्क का भी उद्घाटन करेंगे। इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार लोहिया के मुताबिक, देश में पहली बार किसी रेलवे स्टेशन पर होटल का निर्माण हुआ है।

होटल में पहुंचने के लिए स्टेशन के अंदर ही एक गेट बनाया गया है। जहां से सीढ़ियों या लिफ्ट के जरिए यात्री ट्रेन से उतरकर सीधे होटल तक पहुंच सकें।

होटल में पहुंचने के लिए स्टेशन के अंदर ही एक गेट बनाया गया है। जहां से सीढ़ियों या लिफ्ट के जरिए यात्री ट्रेन से उतरकर सीधे होटल तक पहुंच सकें।

कोरोना की वजह से देरी हुई
गांधीनगर रेलवे स्टेशन के डेवलेपमेंट का काम मार्च में ही पूरा होना था, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के चलते तीन महीने की देरी हुई। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 318 कमरे वाले फाइव स्टार होटल की बिल्डिंग के नीचे ही बना है। वहीं, यह देश का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन है, जहां अलग से प्रार्थना रूम और बेबी फीडिंग रूम बनाया गया है।

दीवारों पर गुजरात के अलग-अलग मॉन्यूमेंट्स की तस्वीरें भी बनाई गई हैं, जो यात्रियों को राज्य के इतिहास के बारे में बताती हैं।

दीवारों पर गुजरात के अलग-अलग मॉन्यूमेंट्स की तस्वीरें भी बनाई गई हैं, जो यात्रियों को राज्य के इतिहास के बारे में बताती हैं।

गरुड़ और इंडियन रेलवे ने मिलकर काम किया
गांधीनगर रेलवे एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (गरुड़) तथा इंडियन रेलवे का यह संयुक्त उपक्रम है, जिसमें गरुड़ की हिस्सेदारी 74% है। स्टेशन पर 2.5*2.5 मीटर के 50 स्तंभों के ऊपर 318 कमरों का फाइव स्टार होटल बनाया गया। रेलवे स्टेशन से 22 मीटर ऊपर होटल है तथा वहां पहुंचने के लिए रेलवे स्टेशन के दोनों ओर अंडरपास भी दिए गए।

टिकट विंडो के बगल में ही लिफ्ट और एस्केलेटर
इस बिल्डिंग के नीचे मुख्य प्रवेश द्वार के पास टिकट विंडो के बगल में ही लिफ्ट और एस्केलेटर लगाया गया है, जिससे यात्री को प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में कोई दिक्कत न हो। टिकट विंडो तक पहुंचने के लिए यात्री को डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर से गुजरना होगा। एंट्री गेट के पास ही होटल में एंट्री करने के लिए एक सेपरेट लिफ्ट की व्यवस्था की गई है, जो आपको सीधे होटल के रिसेप्शन तक पहुंचा देगी।

प्लेटफार्म्स को जोड़ने वाले 2 एस्केलेटर, 3 लिफ्ट और 2 पेडेस्ट्रियन (पैदल यात्री) सबवे हैं।

प्लेटफार्म्स को जोड़ने वाले 2 एस्केलेटर, 3 लिफ्ट और 2 पेडेस्ट्रियन (पैदल यात्री) सबवे हैं।

प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भी
नई बिल्डिंग में एंट्री गेट, बुकिंग, लिफ्ट-एस्कलेटर, बुक स्टॉल, खाने-पीने के स्टॉल समेत सभी सुविधाओं के अलावा प्राथमिक उपचार के लिए एक छोटा सा अस्पताल भी बन रहा है। इसके बाद अब स्टेशन की पुरानी इमारत खाली कर दी जाएगी। यहां सिर्फ स्टेशन मास्टर और रेलवे का अन्य स्टाफ ही रहेगा। पूरा स्टेशन CCTV कैमरों की निगरानी में रहेगा।

ऑडियो-वीडियो, LED स्क्रीन के साथ आर्ट गैलरी के लिए डिस्प्ले एरिया भी है।

ऑडियो-वीडियो, LED स्क्रीन के साथ आर्ट गैलरी के लिए डिस्प्ले एरिया भी है।

स्टेशन में कई आधुनिक सुविधाओं के अलावा प्राथमिक उपचार के लिए एक छोटा सा अस्पताल भी है।

स्टेशन में कई आधुनिक सुविधाओं के अलावा प्राथमिक उपचार के लिए एक छोटा सा अस्पताल भी है।

होटल की छत से महात्मा मंदिर, विधानसभा सहित आधे गांधीनगर को निहारा जा सकता है।

होटल की छत से महात्मा मंदिर, विधानसभा सहित आधे गांधीनगर को निहारा जा सकता है।

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