विशेषज्ञों ने बड़े शहरों के अंत का ऐलान कर डाला था। इसके बाद उपनगरीय इलाकों और छोटे शहरों में लोगों का पलायन शुरू हो गया था। - Dainik Bhaskar

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  • Predictions About The End Of Big Cities In The Pandemic Turned Out To Be Wrong; The Notion Of Migration From Big Cities In America Has Been Prevalent Among The Public For A Long Time.

एक घंटा पहलेलेखक: एमिली बेजर

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विशेषज्ञों ने बड़े शहरों के अंत का ऐलान कर डाला था। इसके बाद उपनगरीय इलाकों और छोटे शहरों में लोगों का पलायन शुरू हो गया था। - Dainik Bhaskar

विशेषज्ञों ने बड़े शहरों के अंत का ऐलान कर डाला था। इसके बाद उपनगरीय इलाकों और छोटे शहरों में लोगों का पलायन शुरू हो गया था।

अमेरिका में सिएटल इलाके में कोरोना वायरस के मामले आने और न्यूयॉर्क शहर में तबाही के बाद शहरी जीवन के संबंध में कई भविष्यवाणियां हुई थीं। विशेषज्ञों ने बड़े शहरों के अंत का ऐलान कर डाला था। उपनगरीय इलाकों और छोटे शहरों में लोगों ने पलायन कर दिया। लेकिन, अब बड़े शहरों में फिर हलचल तेज हो गई है। शोधकर्ताओं ने इन आशंकाओं को भी गलत बताया है कि कोविड-19 फैलने का मुख्य कारण घनी बसाहट है।

अमेरिका में लंबे समय से कहा जा रहा है कि बीमारियां, घनी बसाहट, भ्रष्टाचार, आर्थिक संकट, टेक्नोलॉजी, आतंकवाद या वायरस महामारी शहरों को खत्म कर देंगे। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्री एरिक क्लिनेनबर्ग कहते हैं, शहरों का विरोध अमेरिका का धर्म है। शहर जब मुश्किल में होते हैं तब धारणा बढ़ जाती है। यह सैद्धांतिक विचार राष्ट्रपति थॉमस जेफरसन के जमाने से चल रहा है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में शहरी नियोजन की प्रोफेसर इनग्रिड गोल्ड एलेन कहती हैं, शहरों को परिवारों के रहने लायक नहीं माना जाता था।

महामारी आने के साथ शहरों के प्रति सैद्धांतिक घृणा फिर सामने आई थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अन्य अनुदारवादी राजनेताओं को शहरी संकट के संकेतों पर आनंदित होते देखा गया। येल ला स्कूल में प्रोफेसर डेविड श्लीशर कहते हैं, शहर विरोधी भावनाओं का महामारी के बीच उभरना स्वाभाविक था। वैसे, फ्रांस में किसी ने ऐसा नहीं कहा कि पेरिस खत्म हो जाएगा। महामारी में वे लोग भी शहरों के अंत की भविष्यवाणी कर रहे थे जो शहरों में रहते हैं।

शहरों के विकास का मॉडल कायम रहेगा
शहरों के खत्म होने का मतलब श्वेत पेशेवर लोगों की एक खास श्रेणी के लिए शहरों की समाप्ति था। दूसरी ओर महामारी के बीच अश्वेतों ने शहर नहीं छोड़े। कम वेतन वाले लोग काम पर शहर आते-जाते रहे। सच है कि कुछ शहरों में लोगों की संख्या घटी है। लेकिन, यह ट्रेंड भ्रामक है। न्यूयॉर्क शहर से लोग इलाके के आसपास के छोटे शहरों में गए हैं। लॉसएंजिलिस, सिएटल से लोग आस्टिन चले गए लेकिन उनकी आवाजाही बड़े शहरों में बनी रही। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर मेडेन ने लिखा है कि शहरों के विकास का मॉडल थोड़े हेरफेर के साथ बना रहेगा।

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