मोहम्मद रफी ने इस हादसे के बाद से से एक घूंट पानी भी नहीं पिया है। वे रोते हुए कहते हैं कि उन्हें जरा भी ऐसा लगता कि यह इमारत कमजोर हो गई है तो वे इसे छोड़ देते। - Dainik Bhaskar

मुंबई7 मिनट पहले

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मोहम्मद रफी ने इस हादसे के बाद से से एक घूंट पानी भी नहीं पिया है। वे रोते हुए कहते हैं कि उन्हें जरा भी ऐसा लगता कि यह इमारत कमजोर हो गई है तो वे इसे छोड़ देते। - Dainik Bhaskar

मोहम्मद रफी ने इस हादसे के बाद से से एक घूंट पानी भी नहीं पिया है। वे रोते हुए कहते हैं कि उन्हें जरा भी ऐसा लगता कि यह इमारत कमजोर हो गई है तो वे इसे छोड़ देते।

मॉनसून की जोरदार दस्तक के साथ मुंबईवासियों की मुसीबत बढ़ने लगी है। बुधवार दिनभर हुई बारिश के बाद देर रात मलाड वेस्ट के मालवानी इलाके में एक चार मंजिला इमारत ढह गई। इसका मलबा पास के एक घर पर गिरा और कुल 11 लोगों की मौत। मरने वालों में 43 साल के मोहम्मद रफी के परिवार के 9 सदस्य शामिल थे। हादसे में घायल हुए 8 लोगों में तीन की हालत गंभीर बनी हुई है। रफी अब इस दुर्घटना के बाद अपनों की निशानियों को इस मलबे में तलाश रहे हैं।

इस दुर्घटना के बाद रफी बदहवास हो चुके हैं। पड़ोसी और आसपास के लोग उन्हें दिलासा दे रहे हैं।

इस दुर्घटना के बाद रफी बदहवास हो चुके हैं। पड़ोसी और आसपास के लोग उन्हें दिलासा दे रहे हैं।

दूध लेने बाहर गए, लौटे तो जमीदोज ही चुकी थी इमारत
रफी बाताते हैं कि रात करीब 10 बजे वे दूध लेने के लिए बाहर गए थे। कुछ देर बाद लौटे तो इमारत जमींदोज हो चुकी थी। पहले तो उन्हें अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन किसी तरह हिम्मत जुटा कर धूल के गुबार के बीच मलबा हटाने का प्रयास शुरू कर दिया। हालांकि, उनका यह प्रयास नाकाफी रहा और सुबह होते-होते उनके परिवार के 9 लोगों के शव उनकी आंखों के सामने थे।

मरने वालों में उनकी तीन मासूम भतीजियां भी शामिल हैं।

मरने वालों में उनकी तीन मासूम भतीजियां भी शामिल हैं।

जान गंवाने वाले 9 लोगों में से 6 बच्चे थे
रफी के परिवार के जिन 9 लोगों की मौत हुई उनमें उनकी पत्नी, भाई-भाभी और उनके 6 बच्चे थे। रफी का एक भतीजा तो सिर्फ डेढ़ साल का था। बदहवास हाल में वे पूरी रात वहीं बैठे रहे और अपनी आंखों के सामने अपनों के शवों को बाहर निकलते देखते रहे। उन्होंने बताया, ‘हमें नहीं लगा था कि यह इमारत जर्जर हो चुकी है, नहीं तो हम इसे पहले ही छोड़ देते। रफी और उनके भाई पूरे परिवार के साथ इमारत के तीसरे फ्लोर पर छोटे-छोटे तीन कमरों में रहते थे।

रफी ने इस हादसे में अपने इन करीबियों को खोया

  • शफीक मोहम्मद सलीम सिद्दीकी (45)
  • तौसीफ शफीक सिद्दीकी (15)
  • अलीशा शफीक सिद्दीकी (10)
  • आलिफशा शफीक सिद्दीकी (1.5)
  • हसीना शफीक सिद्दीकी (6)
  • इशरत बानो रफी सिद्दीकी (40)
  • रहीशा बानो शफीक सिद्दीकी (40)
  • ताहिस शफीक सिद्दीकी (12)
  • जॉन इर्रानन्न (13)
BMC के कर्मचारी लगातार मलबे के ढेर को हटाने का प्रयास कर रहे हैं।

BMC के कर्मचारी लगातार मलबे के ढेर को हटाने का प्रयास कर रहे हैं।

BMC ने इस इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया था
इस इमारत में 3 से 4 परिवार रहते थे। हालांकि, दो परिवार कुछ दिन पहले ही यहां से दूसरी जगह चले गए थे। BMC सूत्रों की मानें तो अब्दुल हमीद रोड पर न्यू कलेक्टर कंपाउंड में बनी यह इमारत बुधवार को हुई बारिश से पहले ‘ताऊ ते’ चक्रवात के दौरान ही कमजोर हो गई थी। BMC की टीम ने कुछ दिन पहले सैकड़ों इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कर 21 इमारतों को खतरनाक घोषित किया था। हालांकि, उस लिस्ट में यह इमारत नहीं थी। इसका भी ऑडिट हुआ होता तो आज एक बड़ा हादसा टल जाता।

भाजपा कह रही-यह दुर्घटना नहीं हत्या है
भाजपा नेता राम कदम इस हादसे के लिए शिवसेना को जिम्मेदार बता रहे हैं। वे कहते हैं, ‘यह शिवसेना शासित BMC की लापरवाही के कारण हुआ है। यह हादसा नहीं हत्या है।’ हादसे के बाद पीड़ितों को मरहम लगाने के लिए सरकार ने 5-5 लाख के मुआवजे का ऐलान किया। CM उद्धव ठाकरे भी बेटे के साथ मुंबई के शताब्दी हॉस्पिटल घायलों का हालचाल जानने के लिए पहुंचे, जहां रोते हुए घायलों ने अपना हाल उन्हें बताया।

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