More Chinese companies put on America's blacklist, their technology is allegedly misused in human rights violations | बायडेन सरकार ने चीन की 28 कंपनियों को बैन किया, इनकी टेक्नोलॉजी के मानवाधिकार हनन में इस्तेमाल होने का आरोप

  • Hindi News
  • Business
  • More Chinese Companies Put On America’s Blacklist, Their Technology Is Allegedly Misused In Human Rights Violations

12 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
  • अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में चीन की 31 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया था
  • कुछ और कंपनियों को बैन के दायरे में लाए जाने से ब्लैकलिस्ट में शामिल कंपनियों की संख्या 59 हो गई है
  • ब्लैकलिस्ट में जिन कंपनियों का नाम होता है, उनमें अमेरिकी निवेशकों को पैसा लगाने की इजाजत नहीं होती है

अमेरिका में सत्ता बदली और डॉनल्ड ट्रंप की जगह जो बायडेन आए, लेकिन चिर-प्रतिद्वंद्वी चीन पर सरकार का दबाव बना हुआ है। दरअसल, बायडेन गवर्नमेंट ने गुरुवार को पूर्ववर्ती ट्रंप सरकार की बनाई ब्लैकलिस्ट में चीन की 28 कंपनियों को डाल दिया।

ब्लैकलिस्ट में जिन कंपनियों का नाम डाला जाता है, उनमें अमेरिकी निवेशकों को पैसा लगाने की इजाजत नहीं होती है। अमेरिका का मानना है कि ये कंपनियां चीन की सरकार को जो सैन्य और सुरक्षा उपकरण मुहैया करा रही हैं, उनका दुरुपयोग हो रहा है।

ट्रंप सरकार ने चीन की 31 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया था

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में अवांछित कारोबारी संबंधों को लेकर चीन की 31 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया था। अमेरिकी सरकार के मुताबिक ये कंपनियां चीन की सेना और सुरक्षा एजेंसियों को सैन्य साजोसामान सप्लाई कर रही हैं या सपोर्ट दे रही हैं, जिनका दुरुपयोग हो रहा है। चीन की कुछ और कंपनियों को बैन के दायरे में लाए जाने से अमेरिकी सरकार की बनाई इस ब्लैकलिस्ट में शामिल कंपनियों की संख्या 59 हो गई है।

ब्लैकलिस्टेड कंपनियों में ज्यादातर, चीन को सर्विलांस टेक्नोलॉजी मुहैया कराती हैं

जो बायडेन प्रशासन ने जिन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट में डाला है, उनमें ज्यादातर चीन सरकार को सर्विलांस टेक्नोलॉजी मुहैया कराती हैं। चीन उन कंपनियों की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल विरोधियों की आवाज को दबाने और मानवाधिकार का हनन करने में करता है, ऐसा अमेरिकी सरकार का आरोप है। उसका कहना है कि चीन के ऐसा करने से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है और उनके लोकतांत्रिक मूल्य कमजोर होते हैं।

ब्लैकलिस्ट में टेलीकॉम, कंस्ट्रक्शन और टेक्नोलॉजी सेक्टर की बड़ी कंपनियां

चीनी कंपनियों की अमेरिकी ब्लैकलिस्ट में टेलीकॉम, कंस्ट्रक्शन और टेक्नोलॉजी सेक्टर की बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इनमें चाइना मोबाइल, चाइना टेलीकॉम, वीडियो सर्विलांस कंपनी हाइकविजन (Hikvision) और चाइना रेलवे कंस्ट्रक्शन कॉर्प का नाम है। चीन के खिलाफ अमेरिकी सरकार की तरफ से उठाए गए कई कदमों से दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए हैं।

चीन का आरोप, ब्लैकलिस्ट करने का अमेरिकी सरकार का कदम राजनीति से प्रेरित

चीन की सरकार ने अपने यहां की कुछ और कंपनियों को अमेरिका की ब्लैकलिस्ट में डाले जाने से पहले के ट्रंप सरकार की ब्लैकलिस्ट के खिलाफ विरोध जताया था। उसका कहना था कि अमेरिकी सरकार का कदम राजनीति से प्रेरित है, इसलिए वह अपने देश की कंपनियों के अधिकारों की रक्षा करेगी। उसका आरोप है कि अमेरिकी सरकार ने चीन की जिन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया है, वह उनसे जुड़े तथ्यों और वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज कर रही है।

बैन से बाजार में सामान्य कारोबारी व्यवस्था बिगड़ेगी, अमेरिकी निवेशकों को नुकसान होगा

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वैंग वेनविन ने रूटीन ब्रीफिंग में कहा है कि कंपनियों पर बैन लगाए जाने से बाजार में सामान्य कारोबारी व्यवस्था बिगड़ेगी और अमेरिका सहित दुनिया भर के निवेशकों के हितों को नुकसान होगा। वैसे तो बायडेन सरकार ने चीन के साथ कूटनीतिक संबंध बेहतर बनाने की दिशा में काम करने की बात कही है, लेकिन साथ में यह भी कहा है कि डिफेंस और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में उसका रुख सख्त बना रहेगा।

खबरें और भी हैं…

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here