Maharani Web Series News Update; Script Writer Uma Shankar Singh speaks to Bhaskar on controversy | बोले- कट्टर जातिवादियों को ही नागवार गुजरी कहानी, बिहार को तो सभी सरनेम वालों ने लूटा; काश! रानी की तरह राबड़ी विरोध कर पातीं

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पटना3 घंटे पहले

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‘महारानी’ वेब सीरीज के दो डायलॉग चर्चा में हैं। पहला – ‘नवीनवा के पेट में दांत है’, और दूसरा- ‘स्वर्ग नहीं दे पाए तो क्या स्वर हमने तो दिया था।’ दोनों डॉयलॉग अब बिहार की राजनीति के मुहावरे बन गए हैं। बड़ी बात यह कि दोनों ही बयान असल जिंदगी में RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव द्वारा दिए गए हैं। इस वेब सीरीज पर बिहार में सियासी हंगामा भी मचा है।

भास्कर ने इसे लेकर पहले नेशनल अवार्ड प्राप्त फिल्म क्रिटिक विनोद अनुपम से बात की थी। अब भास्कर के लिए प्रणय प्रियंवद ने इस वेब सीरीज की स्क्रिप्ट लिखने वाले उमाशंकर सिंह से बात की है। उमाशंकर बिहार के ही सुपौल के रहने वाले हैं। विनोद अनुपम ने इस सीरीज को लेकर जो भी कहा है, उसे वे बेबुनियाद बताते हैं। पढ़ें, उमाशंकर सिंह से पूरी बातचीत…

सवाल: ‘महारानी’ को लिखते हुए आपने क्या सोचा?
जवाब:
1990 के दशक का बिहार मुझे आकर्षित करता रहा है। मेरा घर सुपौल है। बिहार की राजनीति पर हमने डॉक्यूमेंट्री नहीं बनाई है। इसमें कुछ चीजें उस समय की ली हैं। हमारा दावा किसी की जीवनी पर सीरीज बनाने का नहीं है। हां, राबड़ी देवी से इसकी तुलना हो सकती है। हम पार्टी नहीं बने हैं।

सवाल: फिल्म क्रिटिक विनोद अनुपम ने कहा है कि सवर्ण जातियों को टारगेट किया गया है?
जवाब:
कुछ कट्टर सवर्ण जातिवादियों को यह बहुत नागवार गुजर रही है। कुछ कट्टर पिछड़ी जातियों के लोग इसे पिछड़ा विरोधी बता रहे हैं। याद आते हैं तुलसीदास, जिन्होंने कहा था- जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी। समीक्षक ने कहा है कि इसमें सभी सिंह, पांडेय, तिवारी को भ्रष्ट बताया गया है। अगर वे दोनों आंख खोल के देखते तो उन्हें दिखता, इसमें रानी और कुछेक किरदार को छोड़कर सभी टाइटल वाले किरदारों को भ्रष्ट बताया गया है।

बिहार को बाहर वालों ने नहीं, अपनों ने लूटा है। जिस-जिस सरनेम वालों को मौका मिला है, उन सब ने लूटा है। पढ़े-लिखों ने लूटा है। बिहार का सच अब तक यह रहा है कि मुख्यमंत्री पद की शपथ तो सब ने बहुत फर्राटे से ली है, पर सबसे ज्यादा धोखा उस शपथ के साथ ही किया है।

सवाल: लेकिन आरोप तो यह लग रहा है कि आपने राबड़ी देवी की इमेज बिल्डिंग की कोशिश की है?
जवाब:
नहीं, ऐसा नहीं है। आप देखेंगे कि इसमें रानी भारती और राबड़ी देवी में कुछ समानता है तो हजारों असमानताएं भी है। सीरीज में तो रानी अपने पति के ही खिलाफ चली जाती हैं। ऐसा राबड़ी देवी ने लालू प्रसाद के खिलाफ नहीं किया। वे कर पातीं तो बड़ी बात होती। इसलिए रानी का किरदार राबड़ी देवी से आगे है।

सवाल: कई लोग नाखुश हैं?
जवाब:
आप सबको खुश नहीं कर सकते। OBC एसर्शन था बिहार की पॉलिटिक्स में, उससे बहुत उम्मीद थी। लेकिन वह राह भी भटका, उसे भी हमने दिखाया। लोग आहत हैं तो होना भी चाहिए।

सवाल: आपने तब की राजनीति से दो डॉयलॉग भी लिए हैं। यही दोनों बयान क्यों लिया?
जवाब:
हां, 90 के बाद की राजनीति के कुछ बयान अब फ्रेज की तरह हो गए हैं। जैसे- पेट में दांत वाला बयान और स्वर्ग नहीं दे पाए तो क्या स्वर तो हमने दिया था। इसे हमने भी राजनीति से उठा लिया है।

रोहिणी ने सोशल मीडिया पर मां राबड़ी देवी साथ पोस्ट शेयर की।

रोहिणी ने सोशल मीडिया पर मां राबड़ी देवी साथ पोस्ट शेयर की।

अब जानिए, दोनों बयानों का क्या मतलब है
वेब सीरीज में जब यह कहा जाता है कि ‘नवीनवा के पेट में दांत है’ तो दर्शक बहुत बातें समझ जाते हैं। बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद कहते रहे हैं कि नीतीश कुमार के पेट में दांत है। साल 2009 में जब ललन सिंह ने JDU छोड़ दिया था, तब 2010 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करते थे।

ललन सिंह तब कहते फिर रहे थे कि पेट का दांत वही तोड़ेंगे। समय बदल गया, ललन सिंह नीतीश सरकार में मंत्री बने और अब JDU के सांसद हैं। इनसे जुड़ा राबड़ी देवी का आपत्तिजनक बयान कोर्ट तक चला गया था।

सामाजिक न्याय की बात करने वाले लालू प्रसाद यह भी हमेशा कहते रहे हैं कि स्वर्ग नहीं दिए तो क्या आवाज तो दिए। यह बात वो तब कहते थे, जब उन पर आरोप लगते थे कि दलितों-पिछड़ों के लिए उन्होंने क्या किया है?

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