Karnataka Politics Update | Chief Minister Yediyurappa turns down the offer of Bengal Governor's post, will resign after July 26 on his own terms news and updates | कर्नाटक के CM येदियुरप्पा ने बंगाल के राज्यपाल पद का ऑफर ठुकराया, अपनी शर्तों पर 26 जुलाई के बाद देंगे इस्तीफा

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नई दिल्ली14 मिनट पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने 16 जुलाई को दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। अचानक हुई इस मुलाकात ने येदियुरप्पा के इस्तीफे की अटकलों को हवा दे दी है। दरअसल, इस खबर को हवा देने के पीछे कुछ और बातों का भी जबरदस्त योगदान है। जैसे- येदियुरप्पा की उम्र, कर्नाटक के उभरते हुए नेता और पुराने संघी बी एल संतोष की येदियुरप्पा को लेकर नाराजगी और सांसद शोभा करंदलाजे का मोदी कैबिनेट में शामिल होना। येदियुरप्पा के कैम्प में सक्रिय शोभा का केंद्र में मंत्री बनना एक बड़ा संकेत है।

सूत्रों की मानें तो येदियुरप्पा ने खुद ही इस्तीफे की पेशकश की है, लेकिन इस पेशकश के साथ एक शिकायत भी की है। दरअसल, दिल्ली की राजनीति में सक्रिय कर्नाटक के कुछ नेता येदियुरप्पा की कैबिनेट में कुछ लोगों को लगातार सक्रिय रखने में खास भूमिका निभा रहे हैं। ये लोग येदियुरप्पा को लगातार निशाने पर रखते हैं। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली के नेताओं ने येदियुरप्पा को फिलहाल थोड़े समय और पद पर बने रहने का भरोसा दिया है, लेकिन येदि अपनी खुशी ज्यादा दिन बरकरार नहीं रख पाएंगे।

येदियुरप्पा बोले- कर्नाटक के विकास पर बातचीत हुई
CM येदियुरप्पा शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मिले। फिर उनके स्वर बदल गए उन्होंने साफ कहा, ‘अभी इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। शुक्रवार को मैंने प्रधानमंत्री से भी मुलाकात की थी और हमने राज्य के विकास पर विस्तृत रूप से चर्चा की।’ हालांकि राजनीति के पुराने खिलाड़ी येदि जानते हैं कि अब कुछ ही ओवर बाकी हैं। दिल्ली में हुई घटना तो यही कहती है कि पिच से हटना शायद तय है, सवाल बस कुछ समय का है। सूत्रों की मानें, तो उन्हें हाईकमान ने भरोसा दिया है कि वे 26 जुलाई को अपने 2 साल के शासन का जश्न मना सकते हैं।

बंगाल के राज्यपाल पद का ऑफर स्वीकार्य नहीं
सूत्रों की माने तो येदियुरप्पा को पश्चिम बंगाल में गवर्नर का पद भी ऑफर किया गया, लेकिन येदियुरप्पा ने प्रधानमंत्री मोदी से साफ कहा कि आप चाहें तो इस्तीफा ले लें, लेकिन पश्चिम बंगाल में गवर्नर का पद स्वीकार्य नहीं है। दरअसल, येदियुरप्पा कर्नाटक की राजनीति से तब तक रिटायरमेंट नहीं चाहते, जब तक वे अपने बेटे को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित न करवा लें।

भाजपा के पास कर्नाटक में येदियुरप्पा का विकल्प नहीं
कर्नाटक में 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं। सवाल ये है कि मार्गदर्शक की उम्र में येदि को भाजपा CM क्यों बनाए हुए है? दरअसल, 78 वर्षीय येदियुरप्पा का विकल्प फिलहाल भाजपा के पास मौजूद नहीं है। येदि लिंगायत जाति के कद्दावर नेता हैं। वे कर्नाटक की राजनीति के धुरंधर हैं। फिलहाल उनके कद का नेता कांग्रेस या अन्य किसी पार्टी के पास भी नहीं है। लिहाजा अगर भाजपा उन्हें पद से हटाकर किसी और को मुख्यमंत्री बनाती है तो भी येदियुरप्पा के समर्थन की जरूरत होगी। अगर येदियुरप्पा भाजपा से कन्नी काटते हैं, तो राज्य में इसका नुकसान भी भाजपा को उठाना पड़ सकता है।

येदियुरप्पा पहले दिखा चुके हैं अपनी राजनीतिक हैसियत
येदियुरप्पा ने 31 जुलाई 2011 को भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने 30 नवंबर 2012 को कर्नाटक जनता पक्ष नाम से अपनी पार्टी बनाई थी। दरअसल, येदियुरप्पा के इस कदम के पीछे लोकायुक्त द्वारा अवैध खनन मामले की जांच थी। इसी जांच में येदियुरप्पा का नाम सामने आया था। इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा था। 2014 में येदियुरप्पा फिर भाजपा में शामिल हो गए।

इसके बाद 2018 में कर्नाटक में सियासी नाटक के दौरान पहले ढाई दिन के लिए मुख्यमंत्री बने और इमोशनल स्पीच के बाद सत्ता छोड़ दी। फिर दोबारा 2019 में बहुमत साबित कर मुख्यमंत्री बनने की प्रक्रिया ने भी आलाकमान के सामने येदियुरप्पा का कद बढ़ा दिया था।

भाजपा के संघी नेता येदियुरप्पा को पसंद नहीं करते
कर्नाटक में अवैध खनन मामले में लोकायुक्त जांच में येदियुरप्पा का नाम आने और फिर जेल जाने की वजह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की काफी किरकिरी हुई थी। येदियुरप्पा संघ के पुराने कार्यकर्ता हैं। इसी वजह से भाजपा के वे संघी नेता जो कर्नाटक से जुड़े हैं, येदियुरप्पा को पसंद नहीं करते। संघ को कर्नाटक में बार-बार इस दाग का सामना करना पड़ता है। भाजपा के नेशनल जनरल सेक्रेटरी बी एल संतोष भी संघ के पुराने कार्यकर्ता हैं। बी एल संतोष और येदियुरप्पा के बीच की तनातनी जगजाहिर है। सांसद तेजस्वी सूर्या, संतोष के खास हैं और येदियुरप्पा के खिलाफ मोर्चा खोले बैठे हैं।

येदियुरप्पा नहीं तो कौन बनेगा कर्नाटक का नया CM?
मुख्यमंत्री की रेस में सबसे पहला नाम हुबली धारवाड़ पश्चिम सीट से विधायक अरविंद बेल्लाड का है तो दूसरा नाम कर्नाटक के पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार का है। मौजूदा समय में शेट्टार हुबली ग्रामीण सीट से विधायक हैं। इस रेस में तीसरा नाम बिलगी विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रहे कर्नाटक सरकार में खनन और भूविज्ञान मंत्री मुर्गेश निरानी का है। चौथा नाम बसवराज बोम्मई का है। तेजतर्रार लिंगायत नेता इस समय मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर होम अफेयर्स हैं।

अटकलों के बीच प्रहलाद जोशी को माना जा रहा डार्क हॉर्स
सियासी अटकलों के बीच प्रहलाद जोशी को डार्क हॉर्स माना जा रहा है। प्रहलाद जोशी धारवाड़ से सांसद हैं। केंद्र में संसदीय कार्य मंत्री हैं। प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद कर्नाटक में बड़ी जीत का इनाम मिला और केंद्र में मंत्री बनाए गए। जोशी ब्राह्मण चेहरा हैं और गैर लिंगायत हैं। इसलिए उनका नाम जातिवादी राजनीतिक चर्चा में कम आ रहा है। येदियुरप्पा की दिल्ली में आलाकमान से मुलाकात ने उन्हें छोटी सी अवधि का समय दान दिया है। राजनीति में दो हफ्ते काफी होते हैं। देखना ये होगा कि येदियुरप्पा अगस्त में अपने आप को मार्गदर्शक मंडल में जाने से कैसे रोकते हैं।

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