Due to Kovid, the opportunities for distributing loans decreased, financial institutions turned to the primary stock market | कोविड के चलते लोन बांटने के मौके हुए कम, एक्सेस फंड IPO मार्केट में लगा रहे वित्तीय संस्थान

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नई दिल्ली8 मिनट पहले

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बैंकों और वित्तीय संस्थानों के पास बहुत पैसा है। कोविड के टाइम में लोन लेने वाले बहुत कम हैं। इसको देखते हुए उन्होंने इस साल आए IPO में जमकर पैसा लगाया है। उन्होंने निवेश क्वॉलिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर (QIB) के तौर पर किया है। इस साल अब तक IPO में किया गया उनका निवेश चार साल में सबसे ज्यादा हो गया है।

IPO में बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने किया 870 करोड़ का निवेश

बाजारों से मिली जानकारी के मुताबिक, बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस साल अब तक IPO में 870 करोड़ रुपए का निवेश किया है। 2020 में कोविड से बनी अनिश्चितताओं के बीच IPO मार्केट में सुस्ती रही थी, लेकिन उस दौरान भी उन्होंने उसमें 698 करोड़ रुपए लगाए थे। 2019 में उन्होंने इनमें 461 करोड़ रुपए का निवेश किया था।

बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने 2017 में लगाए थे 4,548 करोड़ रुपए

2017 में इंडिया इंक ने IPO के जरिए रिकॉर्ड रकम जुटाई थी। उस साल बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने QIB के तौर पर उनमें 4,548 करोड़ रुपए लगाए थे। आंकड़ों के मुताबिक कंपनियों ने 2021 में अब तक IPO के जरिए 27,417 करोड़ रुपए जुटाए हैं। पिछले साल उन्होंने 26,108 करोड़ रुपए, 2019 में 11,036 करोड़ रुपए जबकि 2018 में 30,615 करोड़ रुपए जुटाए थे।

50-100 करोड़ तक की रकम प्राइमरी मार्केट में लगाते रहे हैं बैंक

जानकारों के मुताबिक, बैंक पिछले कई वर्षों से अपने ट्रेजरी बुक यानी निवेश वाले फंड से IPO में पैसा लगाते रहे हैं। ज्यादातर बैंक 300-500 करोड़ रुपए तक की रकम निवेश करने की इजाजत लेते हैं। इसमें से 50-100 करोड़ रुपए तक की रकम IPO मार्केट में लगाई जाती रही है।

बैंक आमतौर पर IPO में निवेश लॉन्ग टर्म फायदे के लिए नहीं करते?

आम धारणा यह है कि बैंक आमतौर पर IPO में निवेश लॉन्ग टर्म फायदे के लिए नहीं करते। उनका पूरा ध्यान उनसे लिस्टिंग गेन हासिल करने पर होता है। हालांकि 2019 का साल अपवाद रहा, जब बैंकों ने मुश्किलों में फंसे स्टर्लिंग एंड विल्सन के इश्यू का बेड़ा पार लगाया था।

बैंकों के पास एक्सेस कैश है और IPO से अच्छा रिटर्न मिल रहा है

DAM कैपिटल के एमडी सचिन चांदीवाल कहते हैं, ‘पहले IPO में निवेश के लिए हम बैंकों के पीछे भागते थे। अब वे हमारे पीछे भाग रहे हैं। सितंबर 2020 के बाद से बैंकों के ट्रेजरी इनवेस्टमेंट में तेज उछाल आया है। इसकी दो वजहें हैं, एक तो उनके पास एक्सेस कैश है और दूसरा, IPO में निवेश से अच्छा रिटर्न मिल रहा है।’

IDBI बैंक, ICICI बैंक, SBI, एक्सिस बैंक, BOI, BoB रहे आगे

इस साल IPO में जमकर पैसा लगाने वाले दिग्गज बैंकों में IDBI बैंक, ICICI बैंक, SBI, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ इंडिया (BOI) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) शामिल रहे। ज्यादातर बैंकों ने मजबूत वित्तीय रूप से मजबूत कंपनियों के पब्लिक इश्यू में पैसा लगाया।

बैंकों ने क्लीन साइंस, लक्ष्मी ऑर्गेनिक्स, सोना कॉमस्टार के IPO में पैसा लगाया

बाजार के एक जानकार ने बताया कि बैंकों ने क्लीन साइंस, लक्ष्मी ऑर्गेनिक्स, सोना कॉमस्टार जैसी कंपनियों के इश्यू में पैसा लगाया था। हालांकि उन्होंने शक जताया कि बैंकों ने जोमैटो के IPO में पैसा लगाया होगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल इससे जुड़े डिटेल का इंतजार है।

GR इंफ्रा, MTAR, हैपिएस्ट माइंड्स, इंडियामार्ट में दिखी क्वॉलिटी

मामले के जानकार एक बैंकर ने कहा, ‘IPO में पैसा लिस्टिंग गेन के लिए लगाया जाए, यह जरूरी नहीं। हम आमतौर पर बिजनेस मॉडल देखते हैं और मैनेजमेंट की क्वॉलिटी देखते हैं। बैंकों ने GR इंफ्रा, MTAR टेक्नोलॉजीज, हैपिएस्ट माइंड्स, इंडियामार्ट के IPO में पैसा इसलिए लगाया था, क्योंकि उसमें क्वॉलिटी थी।’

जोमैटो जैसी स्टार्टअप के IPO में निवेश से परहेज करने के आसार

उन्होंने यह भी कहा कि जहां तक GR इंफ्रा की बात है तो इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेस में L&T के अलावा कोई दूसरी अच्छी कंपनी नहीं है, इसलिए बैंकों को उसका इश्यू अच्छा लगा। उनके मुताबिक, जोमैटो जैसी स्टार्टअप के IPO में निवेश को लेकर बैंकों की राय अलग हो सकती है।

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