Danish Siddiqui: नम आंखों के काफिले ने किया दानिश सिद्दीकी को सुपुर्द -ए-खाक

नई दिल्ली: पुलित्‍जर पुरस्‍कार विजेता भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी का पार्थिव शरीर रविवार देर शाम अफगानिस्तान से दिल्ली पहुंचा. इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से उनके पार्थिव शरीर को उनका परिवार जामिया स्थित उन के घर लेकर पुहंचे. जिसके बाद परिवार और उनके करीबियों ने उनको श्रद्धांजलि दी और नम आंखों से सभी ने दानिश सिद्दीक़ी को अलविदा कहा.

फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी कंधार के स्पिन बोल्डक में अफ़ग़ानिस्तान और तालिबान के बीच चल रहे युद्ध को कवर कर रहे थे. उनकी हत्या अफगान सैनिकों और तालिबान आतंकवादियों के बीच भीषण लड़ाई की कवरेज करने के दौरान हुई. शुक्रवार को आई उनकी हत्या की खबर ने ना सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में लोगों को गमगीन कर दिया.

तकरीबन 2 दिन के इंतजार के बाद उनके पार्थिव शरीर को अफ़ग़ानिस्तान से दिल्ली लाया गया. उनके पार्थिव शरीर को दिल्ली लाया जा रहा है इस बात का पता चलते ही जामिया स्थित उनके घर के बाहर लोगों का जमावड़ा शुरू हो गया. जिसमें ना सिर्फ उनके परिजन और उसके घर वाले मौजूद थे बल्कि उनके दोस्त, पड़ोसी और मीडिया के काफी साथी पुहंचे.

नम आंखों से लोगों ने दानिश को अलविदा कहा

दानिश का पार्थिव शरीर रविवार शाम करीब 6 बजे एयर इंडिया की फ्लाइट से अफ़ग़ानिस्तान से दिल्ली पहुंचा जहां उनके पार्थिव शरीर को उनके घर वालों को सौंपा गया. जिसके बाद एंबुलेंस से करीब 8 बजे उनके परिवार वाले उनके पार्थिव शरीर को जामिया स्तिथ उन के घर लेकर पहुंचे. दानिश सिद्दीकी के घर पर पहले से ही बड़ी संख्या में उनके मिलने वाले मौजूद थे. नम आंखों से लोगों ने दानिश को अलविदा कहा.

Danish Siddiqui: नम आंखों के काफिले ने किया दानिश सिद्दीकी को सुपुर्द -ए-खाक

घर के अंदर सिर्फ परिवार वाले मौजूद थे और कुछ करीबी लोग. इसके बाद करीब 9:30 बजे दानिश को आखरी श्रद्धांजलि देते हुए सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए जामिया कब्रिस्तान ले जाया गया. जहां जामिया ग्राउंड में उनकी नमाजे जनाज़ा पढ़ाई गई जिसमें काफी बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.

भारत में एक बेहतरीन पत्रकार खोया- रामदास आठवले

जामिया स्कूल में दानिश की नमाजे जनाजा पढ़ाई गई जिसके बाद जामिया कब्रिस्तान में ही उनको सुपुर्द-ए-खाक किया गया. जामिया स्कूल में दानिश को आखिरी विदाई देने के लिए उनके मिलने वालों का एक बड़ा जमावड़ा था. जहां उनके मिलने वालों के साथ-साथ रामदास आठवले भी दानिश को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे. उन्होंने कहा भारत में एक बेहतरीन पत्रकार खोया है.

लोग सिर्फ दानिश की एक झलक पाना चाहते थे लेकिन परिवार ने लोगों से कहा कि दानिश का चेहरा नहीं दिखाया जा सकता और देखते ही देखते दानिश को सबने अलविदा कह दिया. लेकिन दानिश सिद्दीकी की यादें और उनका काम लोगों के ज़हन में हमेशा जिंदा रहेगा और लोग उनको याद कर भावुक होते दिखे.

जामिया से था दानिश का खास लगाव

बता दे, दानिश जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र थे. दानिश सिद्दीकी ने इस विश्वविद्यालय से मास्टर्स की पढ़ाई की थी और उनके पिता अख्तर सिद्दीकी विश्वविद्यालय में शिक्षा संकाय के डीन थे. सिद्दीकी ने साल 2005-2007 में एजेके मास कम्युनिकेशन सेंटर (एमसीआरसी) से पढ़ाई की और वहां से उनका जुड़ाव काफी रहा.

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