ईबीवी से सिर और गले का एक विशेष प्रकार का कैंसर हो सकता है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

 ईबीवी से सिर और गले का एक विशेष प्रकार का कैंसर हो सकता है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ईबीवी से सिर और गले का एक विशेष प्रकार का कैंसर हो सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक इस खोज से तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों में वायरस की संभावित भूमिका की समझ को बढ़ाने में सहायता मिल सकती है.

नई दिल्ली. भारतीय वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि कैंसर के लिए जिम्मेदार ‘एप्सटीन-बार’ (ईबीवी) वायरस, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में न्यूरॉन को सुरक्षा देने वाली ‘ग्लियाल’ कोशिकाओं को प्रभावित करता है और दिमाग की कोशिकाओं के कुछ विशेष अणुओं को भी अपना निशाना बनाता है.

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक इस खोज से तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों में वायरस की संभावित भूमिका की समझ को बढ़ाने में सहायता मिल सकती है. अल्झाइमर, पार्किंसन और मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के मस्तिष्क की कोशिकाओं में यह वायरस पाया गया है.

बयान के अनुसार, ईबीवी से सिर और गले का एक विशेष प्रकार का कैंसर हो सकता है. इसके अलावा श्वेत रक्त कोशिकाओं, पेट और अन्य अंगों के कैंसर हो सकते हैं. लगभग 95 वयस्क ईबीवी वायरस से संक्रमित होते हैं हालांकि, इसका कोई लक्षण दिखाई नहीं देता और उन कारणों के बारे में बेहद कम जानकारी उपलब्ध है जिनसे इस प्रकार की बीमारी हो सकती है.

रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी की सहायता से यह अध्ययन आईआईटी इंदौर के बायोसाइंस एंड बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ हेमचन्द्र झा, भौतिकी विभाग के डॉ राजेश कुमार और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय पैथोलॉजी संस्थान, नई दिल्ली की डॉ फौजिया सिराज ने किया है.