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गाजियाबाद. गाजियाबाद (Ghaziabad) में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री किए बिना (Property Without Registry) सीधे बायर्स को कब्जा (Possession) देने वाले बिल्डरों (Builders) पर नकेल कसने की तैयारी शुरू हो गई है. जिला प्रशासन (District Administration) अब वैसे बिल्डरों पर कार्रवाई शुरू करने जा रही है, जिन्होंने प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री नहीं कर सीधे आवंटियों कब्जा दे दिया था.

गाजियाबाद के डीएम आर के सिंह (RK Singh) ने ऐसे बिल्डरों पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं. डीएम के आदेश के बाद उन बिल्डरों में खौफ पैदा हो गया है, जिन्होंने आवंटियों के बिना ही फ्लैट सौंप कर करोड़ों के राजस्व का चूना लगाया है.

रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक के बाद डीएम ने दिए आदेश

बीते दिनों गाजियाबाद के डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अब कोरोना का संक्रमण लगभग थम चुका है. ऐसे में शासन की तरफ से जो कर वसूलने का लक्ष्य दिए गए हैं, उसे पूरा किया जाए. इस दौरान डीएम ने स्टांप और रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों से कहा कि आपलोग जांच कर बताएं कि अब जिले में कितने ऐसे बिल्डर हैं, जिन्होंने ग्रुप हाउसिंग आवंटियों को बिना रजिस्ट्री कराए कब्जा जारी किया है.

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स्टांप विभाग ने राजनगर एक्सटेंशन सहित जिले के कई इलाके में ऐसी कई ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों की लिस्ट सौंपी है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जीडीए से स्टांप विभाग को रिपोर्ट मिली है

बता दें कि पिछले कुछ सालों से कुछ बिल्डरों पर आरोप लग रहे हैं कि वह बिना रजिस्ट्री के ही बायर्स को फ्लैट पर कब्जा दे देते हैं. इस तरह की कई रिपोर्ट स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग तक भी पहुंची है. इसी के चलते अब एआईजी स्टांप ने जीडीए को पत्र भी लिखा था. जीडीए से स्टांप विभाग ने ऐसी ग्रुप हाउसिंग की डिटेल रिपोर्ट मांगी है, जिन ग्रुप हाउसिंग के लिए बिल्डरों ने कंप्लीशन सर्टिफिकेट हासिल किया या फर इसके लिए आवेदन किया है.

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ऐसा माना जा रहा है कि स्टांप विभाग ने राजनगर एक्सटेंशन सहित जिले के कई इलाके में ऐसी कई ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों की लिस्ट सौंपी है, जिनका निर्माण कार्य कई साल पहले ही पूरा कर बायर्स को कब्जा भी दे दिया गया है. इन फ्लैट्स की रजिस्ट्री अभी तक नहीं कराई गई है. इस कारण से सरकार को अभी तक स्टांप शुल्क नहीं मिल पाया है.

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