गाजियाबाद जिले के सबसे ज्यादा 365 आवदेन लंबित है

गाजियाबाद जिले के सबसे ज्यादा 365 आवदेन लंबित है

गाजियाबाद जिले के सबसे ज्यादा 365 आवदेन लंबित है

एक तरफ जहां टेलीकॉम कंपनियां पहले से ही राइट ऑफ पॉलिसी न मिलने से परेशान है तो वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में बढ़ रही बैटरी, डीजल और फाइबर की चोरी की घटनाएं बढ़ना भी मुसीबतें खड़ी कर रहा है.

नई दिल्ली. यदि आप भी मोबाइल नेटवर्क के ना मिलने से परेशान हैं या फिर फोन से अचानक बार-बार नेटवर्क पूरी तरह से गायब होने के लिए तो हो सकता है आपकी दिकक्त आने वाले समय में और ज्यादा बढ़े. खासतौर पर यदि आप गाजियाबाद, नोएडा या ग्रेटर नोएडा में रहते हैं तो जल्दी ही आपका टेलीकॉम नेटवर्क (Telecom Network) आपको धोखा दे सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि राइट ऑफ वे (Right Off Way) की पॉलिसी नहीं अपनाने के चलते उत्तर प्रदेश में टेलीकॉम कंपनियों को कई जिलों में नेटवर्क लगाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में टावर कंपनियों ने उत्तर प्रदेश सचिव को चिट्ठी लिखकर मुद्दों को जल्द सुलझाने की मांग की है. 

दरअसल इन जिलों में टेलीकॉम कंपनियों को अपने टावर लगाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कोरोना काल में टावरों की कमी का असर कंज्यूमर के रोजमर्रा के काम पर पड़ना शुरू हो चुका है. नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे जिलों ने अभी तक केबल बिछाने के लिए राइट ऑफ वे पॉलिसी को मंजूरी नहीं दी है. साथ ही टावर लगाने के लिए मंजूरी में लगातार देरी हो रही है. 

जानिए कहां कितने मामले लंबित 

नोएडा अथॉरिटी के पास 299 जबकि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के पास 95 तो गाजियाबाद जिले में 365 आवदेन लंबित है. ग्रेटर नोएडा में दो टावर की सीलिंग गई है तो गाजियाबाद में 32 टावरों की सीलिंग की गई है. नोएडा में चार टावरों को बिजली और गाजियाबाद में 32 टावरों को बिजली देने का काम भी लटका हुआ है.

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चोरियों से भी परेशान कंपनियां

एक तरफ जहां टेलीकॉम कंपनियां पहले से ही राइट ऑफ पॉलिसी न मिलने से परेशान है तो वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में बढ़ रही बैटरी, डीजल और फाइबर की चोरी की घटनाएं बढ़ना भी मुसीबतें खड़ी कर रहा है. स्थिति यह है कि टावर कंपनियों ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को चिट्ठी लिखकर मामले में दखल देने की मांग की है.

बुरा प्रभाव पड़ेगा सर्विस पर

जानकारों का कहना हैं कि लॉकडाउन और वर्क फ्रॉम होम के माहौल में टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है लेकिन सरकारी मंजूरी नहीं होने के चलते कंपनियां कुछ नहीं कर पा रही है. स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो टेलीकॉम सर्विस पर बुरा असर पड़ेगा यानि आम जनता की परेशानियां भी बढ़ेगी. 





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