कोवोवैक्‍स के संशोधित प्रोटोकॉल को मंजूरी मिली है. (File pic)

कोवोवैक्‍स के संशोधित प्रोटोकॉल को मंजूरी मिली है. (File pic)

कोवोवैक्‍स के संशोधित प्रोटोकॉल को मंजूरी मिली है. (File pic)

Corona Vaccine: कोवोवैक्‍स (Covovax) को पुणे में स्थित सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) अमेरिका की कंपनी नोवावैक्‍स के साथ मिलकर बना रहा है.

नई दिल्‍ली. ड्रग्‍स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) की संभावित वैक्‍सीन कोवोवैक्‍स (Covovax) के तीसरे चरण के ट्रायल के लिए संशोधित प्रोटोकॉल को मंजूरी दे दी है. यह ट्रायल बिना प्‍लेसिबो के किया जा सकेगा. प्‍लेसिबो नियंत्रित ट्रायल में कुछ वॉ‍लंटियर्स को दवा या वैक्‍सीन (Corona Vaccine) दी जाती है तो कुछ को प्‍लेसिबो दिया जाता है. इससे शोधकर्ताओं को दवा या वैक्‍सीन के प्रभावीकरण को परखने में मदद मिलती है.

कोवोवैक्‍स को पुणे में स्थित सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) अमेरिका की कंपनी नोवावैक्‍स के साथ मिलकर बना रहा है. संशोधित गाइडलाइंस के तहत देश के 20 अलग-अलग स्‍थानों पर 18 साल से अधिक उम्र के 1800 वॉलंटियर्स को कोवोवैक्‍स लगाई जाएगी.

आईसीएमआर-एनएआरआई के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. अभिजीत कदम ने जानकारी दी है कि कोवोवैक्‍स का ट्रायल जून के मध्‍य में शुरू होने की संभावना है. यह ट्रायल देश के 20 स्‍थानों पर किया जाएगा. इसके लिए वॉलंटियर्स की भर्ती भी जल्‍द की जाएगी. कोवोवैक्‍स के प्रारंभिक तीसरे चरण के ट्रायल के शोध के हिस्‍से को मंजूरी तब मिली थी जब डाटा सेफ्टी मॅनीटरंग बोर्ड के सामने 200 प्रतिभागियों से प्राप्‍त सेफ्टी डाटा पेश किया गया था.

अगस्‍त 2020 में अमेरिकी कंपनी नोवावैक्‍स ने भारतीय कंपनी एसआईआई के साथ एनवीएक्‍स-सीओवी2373 को बनाने और उसे निम्‍न व मध्‍यम आय वाले देशों में बेचने के लिए लाइसेंस अनुबंध किया था. नोवावैक्‍स ने ब्रिटेन में हुए एनवीएक्‍स-सीओवी2373 के तीसरे चरण के ट्रायल के नतीजे पेश किए थे. इसमें दावा किया गया था कि यह वैक्‍सीन कोरोना वायरस से बचाव करने में 89.7 फीसदी प्रभावी है.





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